
ननु शुद्धनयः साक्षादस्ति सम्यक्त्वगोचर: ।
एको वाच्यः किमन्येन व्यवहारनयेन चेत् ॥136॥
अन्वयार्थ : [ननु] शंकाकार का कहना है कि [शुद्धनयः साक्षादस्ति सम्यक्त्वगोचर:] शुद्ध-नय ही साक्षात् सम्यक्त्व को प्रकटानेवाला है इसलिए [एक: वाच्य] एक वह ही मानना चाहिये [किमन्येन व्यवहारनयेन चेत्] अन्य व्यवहार नय से क्या प्रयोजन है, यदि ऐसा कहो तो ?