
सोपरक्तेरुपाधित्वान्नादरश्चेद्विधीयते ।
क्व पदानि नवामूनि जीवः शुद्धेनुभूयते ॥141॥
अन्वयार्थ : [चेत्] यदि [सोपरक्तः उपाधित्वात्] सोपरक्ति के उपाधित्व के कारण [अनादर विधीयते] उसका अनादर किया जावे तो [अमूनि एव पदानि] ये नव पद [क्व] कहाँ मिलेंगे ? और उनके अभाव में [शुद्धजीव क्व अनुभूयते] शुद्ध जीव का भी अनुभव कहां होगा ?