
ननु किञ्चिच्छुभं कर्म किंच्चित्कर्माशुभं ततः ।
क्वचित्सुखं क्वचिद्दु:खं तत्किं दुःखं परं नृणाम् ॥243॥
अन्वयार्थ : कोई कर्म शुभ है और कोई कर्म अशुभ है, इसलिये कहीं पर सुख और कहीं पर दुःख होता है । तो फिर जीवों को कर्मों के कारण केवल दुःख ही क्यों बतलाया गया है ?