ननु धर्मोपदेशादि कर्म तत्कारणं बहिः ।
हेतोरभ्यन्तरस्यापि बाह्यं हेतुर्बहिः क्वचित् ॥702॥
अन्वयार्थ :
धर्म का उपदेश आदि बाह्य कार्य आचार्य आदि की विशेषता का कारण रहा आवे, क्योंकि बाह्य-हेतु कहीं पर अभ्यन्तर-हेतु का बाह्य निमित्त होता है ?