
ननु नेहा विना कर्म कर्म नेहां विना क्वचित् ।
तस्मान्नानीहितं कर्म स्यादक्षार्थस्तु वा न वा ॥706॥
अन्वयार्थ : कहीं भी क्रिया के बिना इच्छा नहीं होती है और इच्छा के बिना क्रिया नहीं होती है इसलिये इन्द्रियों के विषय रहो या न रहो तथापि बिना इच्छा के क्रिया नहीं हो सकती ?