ननु वैभाविका भावा: कियन्त: सन्ति कीदृशा: ।
किं नामानः कथं ज्ञेया ब्रूहि मे वदतां वर ॥959॥
अन्वयार्थ :
वैभाविक भाव कितने हैं, कैसे हैं, क्या नामवाले हैं और कैसे जाने जाते हैं ? हे वक्ताओं के शिरोमणि ! मुझे समझाओ ॥९५९॥