
ननु मोहोदयो नूनं स्वायत्तोऽस्त्येकधारया ।
तत्तद्वपु:क्रियाकारो नियतोऽयं कुतो नयात् ॥980॥
अन्वयार्थ : जबकि मोह का उदय नियम से एक धारा में अपने ही आधीन है, वह शरीरादि के आधीन नहीं है तब फिर वह उस उस शरीर की क्रियारूप से नियत है यह किस युक्ति से बन सकता है ?