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चार ज्ञान क्षायोपशमिक
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ज्ञानं यद्यावदर्थानामस्ति ग्राहकशक्तिमत् ।
क्षायोपशमिकं तावदस्ति नौदयिकं भवेत् ॥1015॥
अन्वयार्थ :
जो ज्ञान जितने अंश में पदार्थों की ग्राहक-शक्ति से युक्त है वह उतने अंश में क्षायोपशमिक है, औदयिक नहीं है ॥१०१५॥