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वैकृत और लौकिक भाव में भेद
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तत्राप्यस्ति विवेकोऽयं श्रेयानत्रोदितो यथा ।
वैकृतो मोहजो भाव: शेषः सर्वोऽपि लौकिकः ॥1022॥
अन्वयार्थ :
पहले जो कुछ कहा है, उसमें भी इतना विवेक कर लेना अच्छा है कि मोह के उदय से जो भाव होता है वह वैकृत भाव है और इसके सिवा शेष सब भाव लौकिक हैं ॥१०२२॥