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असंयतभाव और कषाय चारित्र-मोहनीय के कार्य होने से एक हैं ?
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ननु वाऽसंयतत्वस्य कषायाणां परस्परम् ।
को भेद: स्याच्च चारित्रमोहस्यैकस्य पर्ययात् ॥1121॥
अन्वयार्थ :
असंयतभाव और कषाय इनमें परस्पर क्या भेद है, क्योंकि दोनों ही एकमात्र चारित्र- मोहनीय के कार्य हैं ?