+ प्रश्न -- तब चारित्र-मोहनीय के स्पष्टतः छब्बीस भेद होने चाहिये ? -
ननु चैवं सति न्यायात्तत्संख्या चाभिवर्धताम् ।
यथा चारित्रमोहस्य भेदाः षड्विंशतिः स्फुटम् ॥1129॥
अन्वयार्थ : यदि ऐसा है तो न्‍यायानुसार उसकी संख्या भी बढ़नी चाहिये । तब चारित्र-मोहनीय के स्पष्टतः छब्बीस भेद होने चाहिये ?