+ प्रश्न -- अप्रत्याख्यानावरण आदि कर्मों के उदय से देशव्रत आदि का घात कैसे बनेगा ? -
ननु चाप्रत्याख्यानादिकर्मणामुदयात्‌ क्रमात्‌ ।
देशकृत्स्नव्रतादीनां क्षति: स्यात्तत्कथं स्मृतौ ॥1136॥
अन्वयार्थ : आगम में कहा है कि अप्रत्याख्यानावरण आदि कर्मों के उदय से क्रमश: देशव्रत और सर्व-व्रत आदि का घात होता है सो यह कैसे बनेगा ?