+ गाथा १११-१२० -
अज्जु जिणिज्जइ करहुलउ लइ पइं देविणु लक्खु ।
जित्थु चडेविणु परममुणि सव्व गयागय मोक्खु ॥111॥
अन्वयार्थ : हे भव्य! परम देव को लक्ष में लेकर, शीघ्र आज ही तू मस्त हाथी को जीत ले कि जिस पर चढ़कर परम मुनि सर्व गमनागमन से छूटकर मोक्षपुरी में पहुँच जाते हैं ।