तव दावणु वय भियमडा समदम कियउ पलाणु ।
संजमघरहं उमाहियउ गउ करहा णिव्वाणु ॥113॥
अन्वयार्थ : जिसको तपरूपी दामन-लगाम है, व्रतरूपी चौकड़ा है तथा शम-दमरूपी पलाण है--ऐसे ऊँट पर बैठकर संयमधर निर्वाण को गये ।