वट्ट जु छोडिवि मउलियउ सो तरुवरू अक्यत्थु ।
रीणा पहिय ण वीसमिय फलहिं ण लायउ हत्थु ॥115॥
अन्वयार्थ :
जो तरुवर रास्ते को छोड़कर दूर फला-फूला है वह नकामा है, न तो कोई थके हुए पथिक वहाँ विश्राम लेते हैं और न उसके फलों को कोई हाथ लगाते हैं ।
(उसीप्रकार मार्गभ्रष्ट जीवों का वैभव बेकार है।)