जसु जीवंतहं मणु मुवउ पंचेंदियहं समाणु ।
सो जाणिज्जइ मोक्कलउ लद्धउ पहु णिव्वाणु ॥123॥
अन्वयार्थ : जिसके जीते-जी पांच इन्द्रिय सहित मन मर गया, उसको मुक्त ही जानो; निर्वाणपथ उसने प्राप्त कर लिया ।