तोडिवि सयल वियप्पडा अप्पहं मणु वि धरेहि ।
सोक्खु णिरंतरु तहिं लहहि लहु संसारु तरेहि ॥133॥
अन्वयार्थ : समस्त विकल्पों को तोडकर मन को आत्मा में स्थिर कर, वहां तुझे निरंतर सुख मिलेगा और तू संसार को शीघ्र तिर जायेगा ।