पुण्णेण होइ विहओ विहवेण मओ मएण मइमोहो ।
मइमोहेण य णस्यं तं पुण्ण अम्ह मा होउ ॥138॥
अन्वयार्थ :
पुण्य से विभव मिलता है, विभव से मद होता है, मद से मतिमोह होता है और मतिमोह से नरक होता है । ऐसा पुण्य हमें न हो ।