गहिलउ गहिलउ जणु भणइ गहिलउ मं करि खोहु ।
सिद्धिमहापुरि पइसरइ उप्पाडेविणु मोहु ॥143॥
अन्वयार्थ : हे जीव ! लोग तेरे को 'हठीला-हठीला' (घेला /पागल) कहते हैं तो भले कहो, किन्तु हे हठी ! तू क्षोभ मत करना । तू मोह को उखाड कर सिद्धि-महापुरी में चले जाना ।