अवधउ अक्खरु जं उप्पज्जइ।
अणु वि किं पि अण्णाउ ण किज्जइ॥
आयइं चित्तिं लिहि मणु धारिवि ।
सोउ णिचिंतउ पाय पसारिवि ॥144॥
अन्वयार्थ : जीवों का वध न करो और अन्य के साथ जरा भी अन्याय न करो, इतनी बात चित्त में लिख लो और मन में धारण कर लो -- बस, फिर तुम निश्चिन्त पांव पसार कर सोओ ।