भल्लाण वि णासंति गुण जहिं सहु संगु खलेहिं ।
वइसाणरु लोहहं मिलिउ पिट्टिज्जइ सुघणेहिं ॥148॥
अन्वयार्थ :
दुष्टजन
(खल)
के संग से भले पुरुषों के गुण भी नष्ट हो जाते हैं, जैसे लोहे का संग करने से वैश्वानर
(अग्निदेव)
भी बड़े-बड़े घनों से पीटे जाते हैं ।