हुयवहि णाइ ण सक्कियउ धवलतणु संखस्स ।
फिट्टीसइ मा भंति करि छुडु मिलिया खयरस्स ॥149॥
अन्वयार्थ :
अग्नि भी शंख के धवलत्व को नष्ट नहीं कर सकती, परन्तु यदि वह स्वयं खेर
(काई)
से मिल जाय तो उसका धवलत्व मिट जाता है, इसमें भ्रान्ति न कर।
(अतः कुसंगति न करना।)