पत्तिय पाणिउ दब्भ तिल सव्वइं जाणि सवण्णु ।
जं पुणु मोक्खहं जाइवउ तं कारणु कु इ अण्णु ॥159॥
अन्वयार्थ :
पत्ता, पानी, दर्भ
(डाभ)
, तिल -- इन सबको तू सवर्ण
(वर्णसहित, चेतन, अपने समान)
जान; फिर यदि मोक्ष मे जाना हो तो उसका कारण कोई अन्य ही है, ऐसा जान ।
(पत्ते, पानी आदि वस्तु देव को चढ़ाने से मुक्ति नहीं मिलती, मुक्ति का कारण अन्य ही है ।)