जोइय हियडइ जासु ण वि इक्कु ण णिवसइ देउ ।
जम्मणमरणविवज्जियउ किम पावइ परलोउ ॥164॥
अन्वयार्थ : हे योगी ! जिसके हृदय में जन्म-मरण से रहित एक देव निवास नहीं करता, वह जीव परलोक (मोक्ष) को कैसे पावेगा ?