मूढा जोवइ देवलइं लोयहिं जाइं कियाइं ।
देह ण पिच्छइ अप्पणिय जहिं सिउ संतु ठियाइं ॥180॥
अन्वयार्थ : मूढ जीव, लोगों के द्वारा बनाये गये देवल में देव को खोजते हैं, परन्तु अपने ही देह-देवल में जो शिवसन्त विराजमान है, उसको वे नहीं देखते ।