अप्पापरहं ण मेलयउ आवागमणु ण भग्गु ।
तुस कंडंतहं कालु गउ तंदुलु हत्थि ण लग्गु ॥185॥
अन्वयार्थ :
जिसने आत्मा का परमात्मा से सम्बन्ध नहीं किया और न आवागमन मिटाया, उसे तुस के कूटते हुए बहुत काल बीत गया तो भी तन्दुल का एक दाना भी हाथ में न आया ।