वणि देवलि तित्थइं भमहि आयासो वि णियंतु ।
अम्मिय विहडिय भेडिया पसुलोगडा भमंतु ॥187॥
अन्वयार्थ :
वन में, देवालयों मे तथा तीर्थों में भ्रमण किया, आकाश में भी ढूँढा, परन्तु अरे रे! इस भ्रमण में भेडिये और पशु जैसे लोगों से ही भेंट हुइ
(भगवान का तो कहीं दर्शन न हुआ !)