कुहिएण पूरिएण य छिद्देण य खारमुत्तगंधेण ।
संताविज्जइ लोओ जह सुणहो चम्मखंडेण ॥195॥
अन्वयार्थ : कुत्सित और क्षार (मूत्र) की दुर्गन्ध से भरित छेद लोक को संतापित करता है; जैसे कुत्ता चमड़े के टुकड़े में मूर्छित होकर हैरान होता है ।