उववासह होइ पलेवणा संताविज्जइ देहु ।
धरु डज्झइ इंदियतणउ मोक्खहं कारणु एहु ॥214॥
अन्वयार्थ :
उपवास से प्रतपन होने से देह संतप्त होता है और उस संताप से इन्द्रियों का घर दग्ध हो जाता है -- यही मोक्ष का कारण है ।