कायोऽस्तीत्यर्थमाहारः कायो ज्ञानं समीहते ।
ज्ञानं कर्मविनाशाय तन्नाशे परमं पदम्‌ ॥218॥
अन्वयार्थ : आहार है सो काया की रक्षा के लिये है, काया ज्ञान के समीक्षण के लिये है, ज्ञान कर्म के विनाश के लिये है तथा कर्म के नाश से परमपद की प्राप्ति होती है ।