ससि पोखइ रवि पज्जलइ पवणु हलोले लेइ ।
सत्त रज्जु तमु पिल्लि करि कम्महं कालु गिलेइ ॥220॥
अन्वयार्थ :
चन्द्र पोषण करता है, सूर्य प्रज्जवलित करता है, पवन हिलोरें लेता है ओर काल सात राजू के अन्धकार को पेलकर कर्मों को खा जाता है ।