+ शुद्ध चिद्रूप के सत् ध्यान का फल -
शुद्धचिद्रूपसद्ध्यानाद् गुणाः सर्वे भवंति च ।
दोषाः सर्वे विनश्यंति शिवसौख्यं च संभवेत् ॥18॥
इस शुद्ध चिद्रूप ध्यान से, होते सभी गुण सौख्य शिव ।
भी हो इसी से नष्ट होते हैं इसी से दोष सब ॥२.१८॥
अन्वयार्थ : शुद्धचिद्रूप का भलेप्रकार ध्यान करने से समस्त गुणों की प्राप्ति होती है। राग-द्वेष आदि सभी दोष नष्ट हो जाते हैं और निराकुलतारूप मोक्ष सुख मिलता है ।