
मग्ना ये शुद्धचिद्रूपे ज्ञानिनो ज्ञानिनोपि ये ।
प्रमादिनः स्मृतौ तस्य तेपि मग्ना विधेर्वशात् ॥24॥
हैं शुद्ध चिद्रूप में मगन, ज्ञानी उदय-वश प्रमादी ।
हों भले ज्ञानी मान्यता में तो उसी में मग्न ही ॥२.२४॥
अन्वयार्थ : जो शुद्धचिरूप के ज्ञाता हैं, वे भी उसमें मग्न हैं और जो उसके ज्ञाता होने पर भी उसके स्मरण करने में प्रमाद करने वाले हैं, वे भी उसमें मग्न हैं । अर्थात् स्मृति न होने पर भी उन्हें शुद्धचिद्रूप का ज्ञान ही आनन्द प्रदान करने वाला है ।