+ शरीर को पूज्य बनाने का उपाय -
सप्तधातुमयं देहं मलमूत्रादिभाजनं ।
पूज्यं कुरु परेषां हि शुद्धचिद्रूपचिंतनात् ॥25॥
मल मूत्र आदि से भरा, तन सात धातुय इसे ।
नित शुद्ध चिद्रूप ध्यान से, कर पूज्य पावन अन्य से ॥२.२५॥
अन्वयार्थ : यह शरीर रक्त, वीर्य, मज्जा आदि सात धातु स्वरूप है । मलमूत्र आदि अपवित्र पदार्थों का घर है, इसलिये उत्तम पुरुषों को चाहिये कि वे इस निकृष्ट और अपवित्र शरीर को भी शुद्धचिद्रूरूप की चिंता से दूसरों के द्वारा पूज्य और पवित्र बनावें ।