+ देवादि को पूजने का कारण -
देवं श्रुतं गुरुं तीर्थं भदंतं च तदाकृतिं ।
शुद्धचिद्रूपसद्ध्यानहेतुत्वाद् भजते सुधीः ॥2॥
श्रुत, देव, गुरु, मुनि बिम्ब उनके, तीर्थ आदि ध्यान के ।
हेतु कहे चिद्रूप शुद्धि, सुधी नित सेवें उन्हें ॥३.२॥
अन्वयार्थ : देव, शास्त्र, गुरु, तीर्थ और मुनि तथा इन सबकी प्रतिमा शुद्धचिद्रूप के ध्यान में कारण हैं; बिना इनकी पूजा सेवा किये शुद्धचिद्रूप की ओर ध्यान जाना सर्वथा दुःसाध्य है, इसलिये शुद्धचिद्रूप की प्राप्ति के अभिलाषी विद्वान, अवश्य देव आदि की सेवा उपासना करते हैं ॥२॥