+ निर्ममत्व के बिना शुद्ध चिद्रूप का सद्ध्यान सम्भव नहीं -
कर्मांगाखिलसंगे, निर्ममतामातरं विना ।
शुद्धचिद्रूपसद्ध्यानपुत्रसूतिर्न जायते ॥11॥
माता बिना पुत्रोत्पत्ति, नहीं ज्यों त्यों हो नहीं ।
कर्मज सकल संग निर्ममत्व बिना चिद्रूप ध्यान भी ॥३.११॥
अन्वयार्थ : प्रकार बिना माता के पुत्र उत्पन्न नहीं हो सकता, उसीप्रकार कर्म द्वारा प्राप्त होने वाले समस्त परिग्रहों में ममता त्यागे बिना शुद्धचिद्रूप का ध्यान भी होना असंभव है (पुत्र की प्राप्ति में जिस प्रकार माता कारण है, उसी प्रकार शुद्धचिद्रूप के ध्यान में स्त्री-पुत्र आदि में निर्ममता, 'ये मेरे नहीं हैं' ऐसा भाव, होना कारण है) ॥११॥