+ उदाहरण पूर्वक शुद्ध चिद्रूप के स्मरण की विधि -
अंगस्यावयवैरंगमंगुल्याद्यैः परामृशेत् ।
मत्याद्यैः शुद्धचिद्रूपावयवैस्तं तथा स्मरेत् ॥19॥
ज्यों देह अवयव अंगुली, आदि से तन स्पर्श हो ।
त्यों शुद्ध चिद्रूप अंश मति आदि से उसका ध्यान हो ॥३.१९॥
अन्वयार्थ : जिस प्रकार शरीर के अवयव अंगुली आदि से - शरीर का स्पर्श किया जाता है, उसी प्रकार शुद्धचिद्रूप के अवयव जो मतिज्ञान आदि हैं उनसे उसका स्मरण करना चाहिये ॥१९॥