
अनुभूय मया ज्ञातं सर्व जानाति पश्यति ।
अयमात्मा यदा कर्मप्रतिसीरा न विद्यते ॥11॥
कर्मावरण जब हटे तब, यह आत्मा सब जानता ।
सब देखता ऐसा मुझे, है ज्ञात अनुभव से सदा ॥४.११॥
अन्वयार्थ : जिस समय कर्मरूपी परदा इस आत्मा के ऊपर से हट जाता है, उस समय यह समस्त पदार्थों को साक्षात् जान-देख लेता है। यह बात मुझे अनुभव से मालम पड़ती है।