
अनुभूत्या मया बुद्धमयमात्मा महाबली ।
लोकालोकं यतः सर्वमंतर्नयति केवलः ॥13॥
अनुभूत है यह मुझे केवल आत्मा है महाबली ।
सम्पूर्ण लोकालोक अपने में समा लेता सभी ॥४.१३॥
अन्वयार्थ : यह शुद्ध चेतन्यस्वरूप आत्मा अचिंत्य शक्ति का धारक है, ऐसा मैंने भले प्रकार अनुभव कर जान लिया है; क्योंकि यह अकेला ही समस्त लोक-अलोक को अपने में प्रविष्ट कर लेता है।