
द्वाभ्यां दृग्भ्यां विना न स्यात् सम्यग्द्रव्यावलोक नं ।
यथा तथा नयाभ्यां चेत्युक्तं स्याद्वादवादिभिः ॥20॥
ज्यों भली-भाँति द्रव्य दिखते नहीं दोनों नेत्र बिन ।
त्यों स्याद्वादी मानता, दोनों नयों से युत कथन ॥७.२०॥
अन्वयार्थ : जिस प्रकार एक नेत्र से भले प्रकार से पदार्थों का अवलोकन नहीं होता उसीप्रकार दोनों नयों से ही निर्दोषरूप से कार्य हो सकता है ऐसा स्यादवाद मत के धुरंधर विद्वानों का मत है ।