
निश्चयं क्वचिदालंब्य व्यवहारं क्वचिन्नयं ।
विधिना वर्त्तते प्राणी जिनवाणीविभूषितः ॥21॥
हैं जिनागम से विभूषित विधि पूर्वक निश्चय कभी ।
अवलम्ब लें अवलम्ब लें व्यवहारनय का कहिं कभी ॥७.२१॥
अन्वयार्थ : जो जीव भगवान जिनेन्द्र की वाणी से भूषित हैं, उनके वचनों पर पूर्णरूप से श्रद्धान रखनेवाले हैं वे कहीं व्यवहारनय से काम चलाते हैं और कहीं निश्चयनय का सहारा लेते हैं ।