
शुद्धचिद्रूपसंप्रार्प्तिनयाधीनेति पश्यतां ।
नयादिरहितं शुद्धचिद्रूपं तदनंतरं ॥23॥
नित नयों के आधीन है, निज शुद्ध चिद्रूप प्राप्ति ।
पश्चात् देखो शुद्ध चिद्रूप, नयादि विरहित सभी ॥७.२३॥
अन्वयार्थ : शुद्धचिद्रूप की प्राप्ति नयों के आधीन है । शुद्धचिद्रूप के प्राप्त हुये पश्चात् नयों के अवलंबन की कोई आवश्यकता नहीं ।