+ दु:ख नष्ट करने का उपाय -
स्वात्मध्यानामृतं स्वच्छं विकल्पानपसार्य सत् ।
पिवति क्लेशनाशाय जलं शैवालवत्सुधीः ॥4॥
पीते सुधी काई पृथक् कर, जल तृषा को मिटाने ।
सब विकल्पों को छोड़ शुद्ध, स्व आत्म ध्यानामृत पिएं ॥८.४॥
अन्वयार्थ : जिस प्रकार क्लेश (पिपासा) की शांति के लिये जल के ऊपर पड़ी हुई काई को अलग कर शीतल सुरस निर्मल जल पीया जाता है, उसीप्रकार जो मनुष्य बुद्धिमान हैं, दुःखों से दूर होना चाहते हैं, वे समस्त संसार के विकल्प जालों को छोड़कर आत्मध्यानरूपी अनुपम स्वच्छ अमृत-पान करते हैं -- अपने चित्त को द्रव्य आदि की चिन्ता की ओर नहीं झुकने देते ।