
भेदो विधीयते येन चेतनाद्देहकर्मणोः ।
तज्जातविक्रियादीनां भेदज्ञानं तदुच्यते ॥10॥
निज चेतनात्मक स्वयं से, तन कर्म तज्जन्य विक्रिया ।
का भेद जिससे जानते, वह भेदज्ञान कहा गया ॥८.१०॥
अन्वयार्थ : जिसके द्वारा आत्मा से देह और कर्म का तथा देह एवं कर्म से उत्पन्न हुई विक्रियाओं का भेद जाना जाय उसे भेद-विज्ञान कहते हैं ।