+ भेद-ज्ञान अभी तक प्राप्त नहीं हुआ -
लब्धा वस्तुपरीक्षा च शिल्पादि सकला कला ।
वह्वी शक्तिर्विभूतिश्च भेदज्ञप्तिर्न केवला ॥15॥
वस्तु परीक्षा शिल्प आदि, बहु कलाएं शक्तिआँ ।
वैभव विविध पाया, परन्तु भेद-ज्ञान न पा सका ॥८.१५॥
अन्वयार्थ : इस संसार के अंदर अनेक पदार्थों की परीक्षा करना भी सीखा; शिल्प आदि अनेक प्रकार की कलायें भी हासिल की; बहुत सी शक्तियां और विभूतियां भी प्राप्त की; परन्तु भेदविज्ञान का लाभ आज तक नहीं हुआ ।