
अन्यदीया मदीयाश्च पदार्थाश्चेतनेतराः ।
एतेऽदश्चिंतनं मोहो यतः किंचिन्न कस्यचित् ॥1॥
ये अर्थ चेतन अचेतन, मेरे पराए चिन्तवन ।
है मोह क्योंकि किसी का, कुछ भी नहीं पर, जिन-कथन ॥९.१॥
अन्वयार्थ : ये चेतन और जड़ पदार्थ पराये और अपने हैं इस प्रकार का चिंतवन मोह है; क्योंकि यदि वास्तव में देखा जाय तो कोई पदार्थ किसी का नहीं ।