+ शुद्ध-चिद्रूप का स्मरण नहीं करने में अपना नुकसान -
हित्वा यः शुद्धचिद्रूपस्मरणं हि चिकीर्षति ।
अन्यत्कार्यमसौ चिंतारत्नमश्मग्रहं कुधीः ॥14॥
जो शुद्ध चिद्रूप स्मरण तज, अन्य कार्य करें सतत ।
वे अज्ञ चिन्तामणि तज, पाषाण लेते यों समझ ॥९.१४॥
अन्वयार्थ : जो दुर्बुद्धि जीव शुद्धचिद्रूप का स्मरण न कर अन्य कार्य करना चहते हैं वे चिन्तामणि रत्न को त्यागकर पाषाण ग्रहण करते हैं, ऐसा समझना चाहिये ।