
स्मरंति परद्रव्याणि मोहान्मूढाः प्रतिक्षणं ।
शिवाय स्वं चिदानंदमयं नैव कदाचन ॥18॥
यह मोह से प्रतिक्षण करे पर द्रव्य स्मृति अज्ञ पर ।
शिव हेतु निज चिन्मय चिदानन्दी करे नहिं ध्यान यह ॥९.१८॥
अन्वयार्थ : मूढ़ मनुष्य मोह के वश हो प्रति समय पर-द्रव्य का स्मरण करते है; परन्तु मोक्ष के लिये निज शुद्धचिदानंद का कभी भी ध्यान नहीं करते ।