
ममत्वं ये प्रकुर्वंति परवस्तुषु मोहिनः ।
शुद्धचिद्रूपसंप्राप्तिस्तेषां स्वप्नेऽपि नो भवेत् ॥7॥
जो मोह-वश पर वस्तुओं में, ही ममत्व करें सदा ।
वे शुद्ध चिद्रूप प्राप्त करने, में समर्थ नहीं सदा ॥१०.७॥
अन्वयार्थ : जो मूढ़ जीव पर-पदार्थों में ममता रखते हैं, उन्हें अपनाते हैं - उन्हें स्वप्न में भी शुद्ध-चिद्रूप की प्राप्ति नहीं हो सकती ।