
निर्ममत्वं परं तत्त्वं ध्यानं चापि व्रतं सुखं ।
शीलं खरोधनं तस्मान्निर्ममत्वं विचिंतयेत् ॥14॥
है निर्ममत्व श्रेष्ठ तत्त्व, ध्यान व्रत सुख शील भी ।
इन्द्रिय निरोधादि यही, यों भाओ निर्ममता सभी ॥१०.१४॥
अन्वयार्थ : यह निर्ममत्व सर्वोत्तम तत्त्व है, परम ध्यान, परम व्रत, परम सुख, परम शील है और इससे इन्द्रियों के विषयों का निरोध होता है, इसलिये उत्तम पुरुषों को चाहिये कि वे इस शुद्धचिद्रूप का ही ध्यान करें ।